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कुछ इधर की, कुछ उधर की

कुछ इधर की, कुछ उधर की

वही कारवाँ, वही रास्ते, वही ज़िन्दगी, वही मरहले,
मगर अपने मक़ाम पर, कभी तुम नहीं, कभी हम नहीं।

Wohi Kaarwaan, Wohi Raastay, Wohi Zindagi, Wohi Marhalay –
Magar Apne Maqaam Par, Kabhi Tum Nah!n, Kabhi Hum Nah!n.

– Shakeel Badayuni

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जो दिल के आईने में हो वो ही प्यार के काबिल है,
वरना दीवार के काबिल तो हर तस्वीर हुआ करती है।
– दीपक

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माफ़ी मांगने से यह कभी साबित नहीं होता की आप गलत हैं और वो सही हैं…
माफ़ी का असली मतलब है की आप में रिश्ते निभाने की काबलियत उनसे ज़्यादा है…

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कुछ जुगलबन्दियां

जय हो सरकार

तुम्हारा खून खून, हमारा पानी है।
तुम करो पाप तो वो सरकारी है,
हम करें फ़रियाद तो वो बेमानी है।

तुम करो तो रासलीला,
हम करें तो करैक्टर ढीला।


कविता अर्थ की गुलाम नहीं होती,
इसमें भाषा की लगाम नहीं होती,
जब भी घिरते हैं बादल विपत्ति के,
ये दो बूँदें स्याही नाकाम नहीं होती।
– कवि राजबुन्देली

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छोटे थे तब लडते थे

माँ मेरी है, माँ मेरी है

बड़े होकर लड़ते हैं

माँ तेरी है, माँ तेरी है

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तेरे चेहरे को कभी भुला नहीं सकता,
तेरी यादों को कभी दबा नहीं सकता !
आखिर में मेरी जान चली जायेगी,
मगर दिल में किसी और को बसा नहीं सकता !

‘विजय भल्ला’

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हमने मांगा था साथ उनका
वो जुदाई का गम दे गए
हम यादों के सहारे ही जी लेते
वो भूल जाने की कसम दे गए

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रोने से किसी को पाया नहीं जाता,
खोने से किसी को भुलाया नहीं जाता,
वक्त सबको मिलता है ज़िन्दगी बदलने के लिये,
पर जिन्दगी नहीं मिलती वक्त बदलने के लिये !

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डरपोक हैं वोह लोग जो प्यार नहीं करते,
हौंसला चाहिए बर्बाद होने के लिए।
– सुशांत

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कल रात चाँद बिलकुल आप जैसा था।
वही खूबसूरत वही नूर वही गरूर,
और वही आप की तरह दूर।

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धोखा दिया था जब तुम ने मुझे,
दिल से मैं नाराज़ था,
फिर सोचा की दिल से तुम्हे निकाल दूं,
मगर वो कमबख्त दिल भी तुम्हारे पास था।
– मिश्रा

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रिश्ता बनाना इतना आसान है,
जैसे मिट्टी पर मिट्टी से मिट्टी लिखना।
रिश्ता निभाना इतना कठिन है,
जैसे पानी पर पानी से पानी लिखना।

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प्यार को भूलने वालों में से हम नहीं,
साथ छोड़ने वालों में से हम नहीं,
यह प्यार तो हम उम्र भर निभाएंगे,
क्योंकि वादा तोड़ने वालों में से हम नहीं।

देता है क्यों यह दर्द बस हम ही को,
क्या समझेंगे वो इन आँखों की नमी को,
लाखों दीवाने हों जिस चाँद के,
वो क्या महसूस करेंगे एक तारे की नमी को।
– सुरेश सपोलिया

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एक ग्रामीण की रामायण

एक राम, एक रावण, एक क्षत्री, एक बामना, वा ने वा की सिया चुराई,
वा ने वा से करी लड़ाई, बस इतनी से बात भई, और तुलसी रच दयो पोथन्ना।

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किसी की शकल इतनी बुरी नहीं होती, जितनी उसकी इलेक्शन कार्ड में होती है।
और इतनी सुन्दर भी नहीं होती, जितनी फेसबुक के प्रोफाइल में होती है।
– भट्ट

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किसी इंसान का पहला प्यार बनना कोई बड़ी बात नहीं,
बनना है तो किसी का आखिरी प्यार बनो।
इसलिए कभी यह मत सोचो की तुमसे पहले
वो किसी से प्यार करता था या करती थी,
कोशिश यह करो की तुम्हारे बाद उसे किसी से प्यार की ज़रुरत न पड़े।

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बुराई

इसलिए नहीं पनपती कि
बुरा करने वाले लोग बढ़ गए हैं
बल्कि इसलिए बढ़ती है कि
सहन करने वाले लोग बढ़ गए हैं।

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काम करो ऐसे की पहचान बन जाये
हर कदम ऐसे चलो कि निशान बन जाये
यहाँ ज़िन्दगी तो सब काट लेते हैं
ज़िन्दगी ऐसे जीयो कि मिसाल बन जाये।
– मोहन चकवैश्य

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शिष्य – प्यार का असली मतलब क्या होता है?
गुरु – जो मतलब के लिए किया जाये, वो प्यार कहाँ होता है।

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एक दिन था

कभी पहली बार स्कूल जाने में दर लगता था,
आज हर रास्ता खुद ही चुनते हैं।

कभी मम्मी पापा की हर बात सच्ची लगती थी,
आज उन्हीं से झुड बोलते हैं।

कभी छोटी सी चोट कितना रुलाती थी,
आज दिल टूट जाता है फिर भी संभल जाते हैं।
पहले दोस्त पास साथ खेलने तक याद रहते थे,
आज कुछ दोस्त जान से ज़्यादा प्यारे लगते हैं।

एक दिन टेंशन का मीनिंग माँ से पूछना पड़ता था,
और आज टेंशन सोलमटे लगता है।

एक दिन था जब पल में लड़ना,
पल में मनाना तो रोज़ का काम था।
आज एक बार जो जुड़ा हुए तो रिश्ते तक
खो जाते हैं।

सच्ची ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया।
ना जाने रब ने हमको इतना जल्दी
बड़ा क्यों बना दिया।
– विनीत मिश्रा

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माना तेरी नज़र में कुछ भी नहीं हूँ मैं,
कद्र उनसे पूछ मेरी,
जिनको हासिल नहीं हूँ मैं।

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होशवालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है,
इश्क़ कीजिये फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है।
उनसे नज़र क्या मिली रोशन फिज़ाएँ हो गयी,
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है।
खुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी,
झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है।
हम नज़र से कह न पाये उनसे हाल-ए-दिल कभी,
और वो समझे नहीं यह खामोशी क्या चीज़ है।
– विनीत मिश्रा

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