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Poetry

क्या नाम दूं

अहसास को क्या नाम दूं

क्या नाम दूं अहसास को लिखूँ या यूं ही कह दूं , तुम ही बताओ मैं इसे क्या नाम दूं? इक रिश्ता ख्यालों का, पटारा चंद सवालों का , जिन्हें न पूछ सकूं न पूछना चाहूँ , तुम ही बताओ इस दौर को क्या मकाम दूं? अहसास को लिखूँ या यूं ही कह दूं , तुम ही बताओ मैं इसे क्या ...

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अहसास

अहसास

अहसास अहसास आकर बगल में लेटा, लिपटा, चूमा, हंसी बिखेर गया। यूं लगा झौंका प्यार का आया, पतझड़ में मौसम बहार का लाया, पत्ते अब तक जो सूख रहे थे, उनपर अचानक निखार आया , महसूस कर यह ख्याल आया, जो दूर था वो पास आया। बिन छूए, बिन देखे, लेटी खोई खोई, बेसोच दिल में यह ख्याल आया, नज़रों ...

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ਕੁਛ ਇਧਰ ਦੀ, ਕੁਛ ਉਧਰ ਦੀ

ਕੁਛ ਇਧਰ ਦੀ, ਕੁਛ ਉਧਰ ਦੀ ਕਦੇ ਚੰਨ ਚੰਨ ਕਹਿ ਕੇ ਥਕਦੀ ਨਾ, ਕਦੇ ਹਾਮੀ ਭਰਦੀ ਆਖਦੀ ਨਾ, ਪਹਿਲਾਂ ਬੁੱਲਾਂਆਂ ਤੇ ਹੱਸ ਦਈ, ਫਿਰ ਜੁਲਮਾਂ ਉੱਤੇ ਡੁੱਲ ਜਾਈਦਾ ! ਤੈਨੂੰ ਕੋਲ ਬਿਠਾ ਕੇ ਪੁੱਛਾਂਗੇ, ਕਿੰਜ ਵਾਦੇ ਕਰਕੇ ਭੁੱਲ ਜਾਈਦਾ ! ——————- ਫੇਰ ਕੀ ਹੋਇਆ ਜੋ ਤੂੰ ਮਹਿੰਦੀ ਲਾ ਲਈ, ਹੁਣ ਅਸੀਂ ਵੀ ਸੇਹਰਾ ਸਜਾਵਾਂਗੇ ! ਸਾਨੂੰ ਕੀ ਪਤਾ ਸੀ ਕਿ ...

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Memories Pouring Down

  A William Shakespeare Sonnet Memories Pouring Down   Rain kept falling in the dark stormy night. Extinguishing the sparks in an air flight. Down the memory lane I kept walking, Searching, forgetting then remembering. Touching my soul a warm loving embrace. Whispering knowledge, wisdom in my ears. Leading all the way holding my small hands. That was always you, ...

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भारत टाइम्स का करैक्टर ढीला है

भारत टाइम्स का करैक्टर ढीला है भाई साहिब उड़ाएं गुलछर्रे तो रासलीला है। हम शरेआम भर लें मुस्कान तो करैक्टर ढीला है। वो छलकाएं जाम हर इस मयखाने में, वो लचकाएं कमर हर उस पायदान पे, किसी ने पूछा तक नहीं, बोले समाज ‘सेवक आएला है’। झिझकती पलकें हमारी उठीं ऊपर तो करैक्टर ढीला है। भाई साहिब उड़ाएं गुलछर्रे तो ...

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